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Wednesday, 19 September 2018

मानसून में उत्तराखंड यात्रा... भाग 3....

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अब तक आपने पढ़ा कि पिछले दो दिनों में देहरादून के अधिकतर टूरिस्ट स्पॉट देख लिए गए, मशहूर व्यंजन भी चख लिए गए और थोड़ी बहुत खरीदारी भी हो गयी थी । पहाड़ों पर वर्षा ऋतु भी थोड़ा पहले आ जाती है इसलिए दोनों दिन मौसम सुहाना रहा। 

अगले दिन सो कर उठे तो तेज बारिश हो रही थी। एक बार तो लगा कि आज का दिन बेकार हो जायेगा। सब तैयार हुए, नाश्ता हुआ और पैकिंग कर चेकआउट की तैयारी भी हो गयी। 9 बजे होटल से बाहर निकले, गाड़ी में सामान रखा और चलने के लिए तैयार हुए। आज के प्रोग्राम में देहरादून का वन अनुसन्धान संस्थान (FRI)

Monday, 17 September 2018

मानसून में उत्तराखंड यात्रा... भाग 2....

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 अभी तक आपने पढ़ा कि कैसे हम रूड़की से सीधा आने की बजाय हरिद्वार और ऋषिकेश होते हुए देहरादून पहुंचे। अभी तक हमारी कुल ड्राइविंग 275 किलोमीटर से ज्यादा हो चुकी थी और ड्राइविंग का समय भी 7 घंटे (बीच में रुकने, खाने का समय अलग) तक पहुँच चुका था। सुबह 6 बजे चले थे और अब दोपहर के 3:30 हो रहे थे।

होटल पहुँच कर चेक इन किया, रिसेप्शनिस्ट को मसूरी व्यू रूम देने की गुजारिश की जो कि मान भी ली गयी। कमरे में आते ही सब ढेर हो गए। आँख खुली तो शाम के 5:30 बज चुके थे और हम एक घंटे से ज्यादा सो चुके थे। बच्चों को भी जगाया। चाय पी कर और फ्रेश हो कर सब तैयार हुए। नीचे आ कर गाड़ी ली और चल पड़े देहरादून के इवनिंग स्पॉट राजपुर रोड की तरफ। वहां जाने का मुख्य रास्ता सहारनपुर चौक, रेलवे स्टेशन और प्रिंस चौक हो कर जाता है लेकिन शाम की वजह से ट्रैफिक बहुत होना था। इसलिए हम

Monday, 10 September 2018

मानसून में उत्तराखंड यात्रा... भाग 1....

वर्षा ऋतु आते ही प्रकृति जैसे झूम उठती है। धुले धुले वातावरण, चारों तरफ हरियाली और सुहाने मौसम के कारण वर्षा ऋतु का इंतजार सबको बेसब्री से रहता है, खासकर तब जब 3 महीने की तपती गर्मियों के बाद बारिशों का आना किसी सुकून से काम नहीं होता है। इस मौसम में पहाड़ों की सुंदरता और भी बढ़ जाती है। इन गर्मियों में हमने सपरिवार देहरादून जाने का कार्यक्रम बनाया। गर्मियों की छुट्टियों की वजह से ट्रैन में टिकट मिलना मुश्किल था तो अपनी गाड़ी से जाना ही तय रहा। हमेशा की तरह सप्ताहांत की बजाय सप्ताह के बीच के दिनों का प्रोग्राम रखा ताकि भीड़ भाड़ कुछ काम मिले। बेटे की छुट्टियां तो चल ही रहीं थी। मेरी छुट्टियां अप्रूव होने में भी कोई दिक्कत नहीं आयी। 

निश्चित दिन पर, जो कि बुधवार था, सुबह ६ बजे हम चारों (मैं, पत्नी, बेटा और बेटी) घर से निकल पड़े। गाड़ी में टैंकफुल पेट्रोल और टायरों में हवा, मैं एक दिन पहले ही डलवा चुका था। पीने का पानी, हल्का फुल्का स्नैक्स और